Wednesday, October 15, 2008

बहते पानी की सद्रश्य समय बह रहा है, वर्तमान समय ही हमारी अन्चलि में है !
वर्तमान का सदुपयोग ही भूत-भविष्य को सशक्त कर देता है !
भूतकाल सपना है और भविष्य कल्पना है, केवल वर्तमान ही अपना है !

2 comments:

अंकुर said...

accha hai bhaiya par abhi matter kuch badaiye taaki baat saaf ho sake,blog ki duniya main aapka swagat hai.........

अखिल तिवारी said...

der aaye durust aaye. asha hai ki durust hi rahenge.
likhte rahiye..